दिवाली ऐसा पर्व है जो हमें याद दिलाता है कि जीवन के अंधकार और अज्ञान को ज्ञान और सत्य के दीप से दूर किया जा सकता है। इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा से धन-समृद्धि, शांति, सद्भाव और सकारात्मकता की कामना की जाती है, वहीं भाई-बहन के प्रेम, सामाजिक सहयोग और उदारता की भावना भी प्रबल होती है। दान-पुण्य का विशेष महत्व रहता है और त्योहार के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक विरासत—गीत, लोककथाएँ और परम्पराएँ—अगली पीढ़ी तक संजोकर पहुँचाई जाती हैं। चलिए अब जानते हैं की 2025 में दिवाली कब हैं – 2025 Mein Diwali Kab Hai
दिवाली क्यों मनायी जाती हैं — कारण और धार्मिक मान्यताएँ
- अमावस्या तिथि: इस वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या तिथि इसी समय पड़ती है, और हिन्दू धर्म में दिवाली मुख्यतः अमावस्या की रात को मनाई जाती है।
- दीपों का उत्सव: इस दिन लोग घर-द्वार दीपों, मिट्टी के दिए, मोमबत्तियों और रंगबिरंगी लाइटों से सजाते हैं, ताकि अँधेरे पर प्रकाश की विजय हो। माना जाता है कि माता लक्ष्मी, देवी धन की, इस दिन अपने भक्तों के घरों में आती हैं।
- रामायण की कथा: बहुत से हिन्दुओं की मान्यता है कि इस दिन भगवान राम 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटे थे, और उनकी वापसी पर अयोध्यावासी दीप जलाकर स्वागत कर रहे थे; यही कारण है कि दीपावली (दीवा + अवली अर्थात् दीपों की पंक्ति) कहलाती है।
- धार्मिक और सामाजिक महत्व: इस दिन वाणी, आचार, व्यवहार में उजाला होने की कामना की जाती है — बुराई पर अच्छाई की विजय, अज्ञान पर ज्ञान, अँधेरी मन:-स्थितियों पर सकारात्मक सोच का प्रकाश। यह पर्व परिवार, मित्र और समाज में प्रेम, मेल-जोल, उत्साह एवंआभासी और वास्तविक उजाले का पर्व है।
2025 में दिवाली कब हैं – 2025 Mein Diwali Kab Hai
दिवाली हिन्दू पंचांग के कार्तिक मास में आती है, जब अमावस्या की तिथि होती है और चन्द्रमा आंशिक या पूर्ण रूप से दिखाई नहीं देता। कार्तिक मास सौर (Gregorian) कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर और नवंबर के बीच आता है, और चन्द्रमा तथा सौर चक्रों के मिलान के कारण दिवाली की तिथि हर वर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर पर एक-दो हफ्ते आगे-पीछे हो सकती है। जिस वजह से दिवाली का त्यौहार हर साल अलग अलग तारीख को आता हैं।
2025 Mein Diwali Kab Hai- वर्ष 2025 में दिवाली का मुख्य दिन, अर्थात् लक्ष्मी पूजा और दीपावली, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। पूरा दीपावली पर्व पाँच दिनों तक चलेगा—पहला दिन धनतेरस, दूसरा दिन छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी), तीसरा दिन मुख्य दीपावली (लक्ष्मी पूजा), चौथा दिन गोवर्धन पूजा, और पाँचवाँ दिन भाई दूज। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।
दिवाली के दिन क्या-क्या किया जाता है — परम्पराएँ और रस्म-रिवाज़ें
- घर और प्रांगणों की सफाई और सजावट होती है; रंगोली बनाई जाती है; घरों में दीप जलाए जाते हैं।
- माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है, मन्नतें माँगी जाती हैं।
- मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं, उपहार दिये जाते हैं, पारिवारिक मिलन-समारोह होते हैं।
- पटाखे फोड़े जाते हैं, आतिशबाज़ी होती है (जहाँ-जहाँ अनुमति हो)।
- रात में दीपों से, मोमबत्तियों से और आधुनिक लाइटों से घरों-गली-मण्डपों को जगमगाया जाता है, यह विश्वास करते हुए कि प्रकाश अँधेरे को हराता है।