दीपावली का पाँच दिवसीय महापर्व भाई दूज के साथ पूर्णता को प्राप्त होता है। यह विशेष पर्व भाई-बहन के सच्चे प्रेम, विश्वास और आत्मीय संबंध का प्रतीक माना जाता है। रक्षाबंधन की तरह ही भाई दूज भी इस पवित्र रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाता है। मान्यता है कि कार्तिक मास की द्वितीया तिथि पर यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे, जहाँ यमुना ने उनका तिलक कर आदर-सत्कार किया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि इस तिथि पर बहन के हाथों तिलक करवाने वाला भाई दीर्घायु और भयमुक्त रहेगा। इसी वजह से इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है।
भाई दूज का यह त्योहार भाई-बहन के अटूट बंधन और प्रेमपूर्ण साथ का उत्सव है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और मंगलकामना करते हुए पारंपरिक विधियों का पालन करती हैं। वहीं भाई भी अपनी बहनों की सुरक्षा और सम्मान का वचन देते हैं तथा उपहार देकर अपने प्रेम का इज़हार करते हैं। चाहे दूरी कितनी भी हो, भाई-बहन इस दिन एक-दूसरे से मिलकर या शुभकामनाएं भेजकर इस पर्व को पूरे हर्ष और उमंग के साथ मनाते हैं। अब चलिए जान लेते हैं की 2026 में भाई दूज कब है – 2026 Mein Bhai Dooj Kab Hai
2026 में भाई दूज कब है – 2026 Mein Bhai Dooj Kab Hai
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| त्यौहार का नाम | भाई दूज 2026 |
| त्यौहार का महीना | नवंबर 2026 |
| त्यौहार की तारीख | 11 नवंबर 2026 |
| त्यौहार का दिन | बुधवार |
भाई दूज 2026 का शुभ मुहूर्त क्या हैं – Bhai Dooj 2026 Shubh Muhurat
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भाई दूज तिलक का समय | दोपहर 01 बजकर 10 मिनट से 03 बजकर 20 मिनट तक |
| अवधि | 2 घंटे 10 मिनट |
| द्वितीया तिथि प्रारम्भ | 10 नवम्बर 2026 को दोपहर 02:00 बजे से |
| द्वितीया तिथि समाप्त | 11 नवम्बर 2026 को दोपहर 03:53 मिनट तक |
भाई दूज पर तिलक लगाने की सही विधि व रीति-रिवाज़
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान की पूजा करें।
- मुहूर्त से पहले तिलक की थाली सजाएँ, जिसमें कुमकुम, सिंदूर, चंदन, फल, फूल, मिठाई, अक्षत और सुपारी रखें।
- पिसे चावल के आटे से चौक बनाकर शुभ मुहूर्त में भाई को उस पर बैठाएँ।
- तिलक करें, फूल, सुपारी, बताशे व काले चने दें और आरती उतारें।
- तिलक एवं आरती के बाद भाई को मिठाई खिलाएँ व अपने हाथों से बना भोजन कराएँ।
- तिलक के समय भाई की दीर्घायु और समृद्धि के लिए मंत्र जाप करें —
“गंगा पूजे यमुना को, यमी पूजे यमराज को।
सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे
मेरे भाई आप बढ़ें, फूले-फलें।” - भाई बहन को उपहार देकर सदैव रक्षा का वचन देता है।