भारत में शारदीय नवरात्र से हिंदू त्यौहारों की शुरुआत मानी जाती है, जिनके बाद दशहरा, दिवाली और कई अन्य पर्व आते हैं। इन्हीं में से एक है गोवर्धन पूजा, जो दिवाली के अगले दिन बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और मां तुलसी की विशेष पूजा की जाती है। घर में तुलसी के सामने देसी घी का दीप जलाकर मंत्र जपना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे घर-परिवार में अन्न, धन और समृद्धि बनी रहती है और भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। चलिए अब जानते हैं की 2026 में गोवर्धन पूजा कब हैं – 2026 Mein Govardhan Puja Kab Hai
2026 में गोवर्धन पूजा कब हैं – 2026 Mein Govardhan Puja Kab Hai
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| त्यौहार | गोवर्धन पूजा |
| गोवर्धन पूजा कब हैं 2026 | 10 नवम्बर 2026, मंगलवार |
| गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त | 06:39:23 से 08:49:34 तक |
| अवधि | 2 घंटे 10 मिनट |
गोवर्धन पूजा 2026 में कब हैं – Govardhan Puja 2026 Mein Kab Hai
दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट भी कहा जाता है, भारतीय लोकजीवन में विशेष महत्व रखती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर मनाए जाने वाले इस पर्व पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर भक्तों को इंद्र की वर्षा से बचाने की लीला का स्मरण किया जाता है। इस दिन गायों की पूजा की जाती है और प्रकृति तथा पर्यावरण के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। गोवर्धन पूजा श्रद्धा, आस्था और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
2026 Mein Govardhan Puja Kab Hai– गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है, वर्ष 2026 में मंगलवार, 10 नवम्बर को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 06:40 बजे से 08:50 बजे तक रहेगा, जिसकी अवधि 2 घंटे 10 मिनट की होगी। इस दिन द्यूत क्रीड़ा भी आयोजित की जाती है। प्रतिपदा तिथि 9 नवम्बर दोपहर 12:31 बजे से प्रारंभ होकर 10 नवम्बर दोपहर 2:00 बजे तक रहेगी। हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, क्योंकि यह पर्व प्रकृति और मानव के संबंध को दर्शाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाने वाला यह त्योहार दिवाली के अगले दिन आता है। पूरे भारत में इसकी धूम रहती है, लेकिन ब्रज भूमि — मथुरा, वृंदावन, नंदगांव, गोकुल और बरसाना — में इसका विशेष आकर्षण होता है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल वासियों को इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पूजा करने की प्रेरणा दी थी और देवराज इंद्र के अहंकार का नाश किया था।
गोवर्धन पूजा से जुड़ी पौराणिक कथा
विष्णु पुराण में गोवर्धन पूजा के महत्व का विस्तृत वर्णन मिलता है। कहा गया है कि जब देवराज इंद्र को अपनी शक्तियों पर अहंकार हो गया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनके अभिमान को दूर करने के लिए एक दिव्य लीला रची। कथा के अनुसार, एक बार गोकुल में सभी लोग हर्षोल्लास के साथ पकवान बना रहे थे और गीत गा रहे थे। यह देखकर बालकृष्ण ने माता यशोदा से पूछा कि वे किस उत्सव की तैयारी कर रहे हैं। यशोदा ने बताया कि वे देवराज इंद्र की पूजा कर रहे हैं, क्योंकि उनकी कृपा से वर्षा होती है और अन्न-घास की प्राप्ति होती है। तब श्रीकृष्ण ने कहा कि हमें इंद्र नहीं, बल्कि गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि वहीं हमारी गायें चरती हैं और वहीं की हरियाली से वर्षा होती है।
श्रीकृष्ण की बात मानकर गोकुलवासी गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। यह देखकर इंद्र क्रोधित हो गए और बदले में उन्होंने मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और समस्त ग्रामवासियों को उसके नीचे आश्रय दिया। सात दिनों तक निरंतर वर्षा के बावजूद गोकुलवासियों को कोई हानि नहीं हुई। अंततः इंद्र को एहसास हुआ कि वे किसी साधारण बालक से नहीं, स्वयं भगवान से टकरा रहे हैं। उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी और उनकी स्तुति कर पूजा की। उसी पौराणिक घटना के उपलक्ष्य में गोवर्धन पूजा का आरंभ हुआ। इस दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का विशेष महत्व है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित यह पर्वत आज भी श्रद्धा और भक्ति का केंद्र है, जहाँ हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं।