भाई दूज 2026 में कब है

2026 में भाई दूज कब है | 2026 Mein Bhai Dooj Kab Hai

भाई दूज की परंपरा यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार, कार्तिक मास की द्वितीया तिथि पर यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर पहुँचे। यमुना ने उनका तिलक किया, आरती उतारी और प्रेमपूर्वक भोजन कराया। अपनी बहन के स्नेह से प्रसन्न होकर यमराज ने आशीर्वाद दिया कि इस दिन जो भी भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।

गोवर्धन पूजा 2026 में कब हैं

2026 में गोवर्धन पूजा कब हैं | 2026 Mein Govardhan Puja Kab Hai

दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट भी कहा जाता है, भारतीय लोकजीवन में विशेष महत्व रखती है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर मनाए जाने वाले इस पर्व पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर भक्तों को इंद्र की वर्षा से बचाने की लीला का स्मरण किया जाता है।

दिवाली 2026 में कब हैं

2026 में दिवाली कब हैं | 2026 Mein Diwali Kab Hai

इन दिनों में पूजा-अर्चना, भोग, मिठाइयाँ और पारंपरिक व्यंजनों की विशेष तैयारी की जाती है। केवल हिंदू धर्म ही नहीं, बल्कि बौद्ध, जैन और सिख धर्म के अनुयायी भी इसे अपने-अपने धार्मिक महत्व के साथ मनाते हैं। जैन धर्म में यह भगवान महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में, जबकि सिख समुदाय में इसे ‘बंदी छोड़ दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

दिसंबर में एकादशी कब हैं

December Mein Ekadashi Kab Hai

जो व्यक्ति श्रद्धा भाव से एकादशी का व्रत करता है, वह पुण्यफल प्राप्त कर उत्तम लोक को जाता है और अंततः मोक्ष को प्राप्त होता है। इस व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से नियम-संयम के साथ की जाती है और द्वादशी को पारण किया जाता है। एकादशी के दिन उपवास, दान-पुण्य, रात्रि जागरण और भगवान के भजन-कीर्तन का विशेष महत्व बताया गया है।

नवंबर में एकादशी कब हैं

नवंबर में एकादशी कब हैं | November Mein Ekadashi Kab Hai

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह में दो एकादशी व्रत आते हैं — एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। इन व्रतों का आरंभ चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की ‘पापमोचिनी एकादशी’ से होता है और समापन फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की ‘आमलकी एकादशी’ के साथ होता है। इसी क्रम में नवंबर माह में भी दो एकादशी व्रत पड़ेंगे, जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्व है।

2026 में एकादशी कब कब हैं

2026 में एकादशी का व्रत कब हैं | 2026 Mein Ekadashi Ka Vrat Kab Hai

महाभारत काल में भी इस व्रत का विशेष महत्व रहा है। पांडवों और पितामह भीष्म ने भी एकादशी व्रत का पालन किया था। कथा के अनुसार, इसी व्रत के प्रभाव से भीष्म पितामह ने अपनी मृत्यु का समय स्वयं चुना था। एकादशी व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्मसंयम, साधना और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है।

करवाचौथ पर चाँद कितने बजे निकलेगा

करवाचौथ पर चाँद कब निकलेगा 2025 | Karva Chauth Ka Chand Kab Niklega 2025

चंद्रोदय के बाद मिट्टी के करवे से चंद्रमा को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने पति के हाथों से पानी पीकर व्रत तोड़ती हैं। यह पर्व वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है और पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

शरद पूर्णिमा 2026 कब हैं

2026 में शरद पूर्णिमा कब हैं | 2026 Mein Sharad Purnima Kab Hai

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि जो व्यक्ति इस रात जागरण कर पूजा-अर्चना करता है या किसी शुभ कार्य में संलग्न रहता है, उसे सुख, धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी विशेष है।

धनतेरस 2026 में कब हैं

2026 में धनतेरस कब हैं | 2026 Mein Dhanteras Kab Hai

धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है, का सनातन धर्म में खास महत्व है। इस दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था, जिन्हें आयुर्वेद का जनक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय धन्वंतरि देव हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन बर्तन, सोने और चांदी की खरीदारी करना शुभ माना जाता है।

करवाचौथ पर चाँद कब निकलेगा

करवाचौथ पर चाँद कितने बजे निकलेगा 2025 | Karva Chauth Par Chand Kitne Baje Niklega 2025

इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए सोलह श्रृंगार करती हैं और निर्जला उपवास रखती हैं। परंपरा के अनुसार, महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और पूरे दिन बिना अन्न-जल के व्रत का पालन करती हैं। शाम को पूजा-अर्चना कर चंद्रमा के दर्शन और पति के दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है।