भारत के त्यौहार अपनी विविधता और सांस्कृतिक रंगों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। यहाँ दीपावली, होली, ईद, क्रिसमस जैसे त्यौहार मिलजुल कर मनाए जाते हैं, जो एकता और भाईचारे का संदेश देते हैं।
भारत के त्यौहार
अहोई अष्टमी 2026 में कब हैं
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपने बच्चों की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन के लिए करती हैं। जिस प्रकार करवा चौथ का व्रत पति की दीर्घायु के लिए रखा जाता है, उसी प्रकार अहोई अष्टमी का व्रत संतान की सुरक्षा और आयु वृद्धि के लिए किया जाता है।
करवाचौथ 2026 में कब हैं
करवा चौथ के दिन महिलाएं करवा माता की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर व्रत कथा का पाठ करती हैं और जीवन में सुख-शांति तथा वैवाहिक सौभाग्य की कामना करती हैं। इस दिन इत्र, केसर, सिंदूर और लाल चुनरी का दान करना शुभ माना जाता है, जिससे दांपत्य जीवन में खुशहाली और सौहार्द बना रहता है।
दशहरा 2026 में कब हैं
मान्यता है कि इसी तिथि को भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी और मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। यह पर्व नवरात्रि के समापन का प्रतीक होने के साथ-साथ साहस, धर्म और सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।
3 अक्टूबर को कौन सी ग्यारस हैं
पापांकुशा का अर्थ है पापों को अंकुश लगाने वाली, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-शांति और मानसिक संतोष प्राप्त होता है। व्रत के दौरान नियमों का पालन करना आवश्यक है, क्योंकि इससे व्रत का पूर्ण फल मिलता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कर्म और भक्ति से व्यक्ति अपने किए गए पापों से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।
अक्टूबर में एकादशी कब हैं
हिंदू धर्म के अनुसार, प्रत्येक मास में आने वाली एकादशी तिथि को विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना के लिए माना जाता है। यह दिन धर्म, शांति और आत्मिक उन्नति का प्रतीक है। भक्त इस दिन निर्जल या फलाहार का उपवास रखते हैं और विष्णु जी की भव्य पूजा-अर्चना करते हैं। मास में कुल दो बार आने वाली एकादशी का उद्देश्य मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करना है।
शरद पूर्णिमा कब हैं
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि जो व्यक्ति इस रात जागरण कर पूजा-अर्चना करता है या किसी शुभ कार्य में संलग्न रहता है, उसे सुख, धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी विशेष है।
छठ पूजा कब हैं 2025
हर साल कार्तिक माह में छठ पूजा का आयोजन बड़े धूमधाम और आस्था के साथ किया जाता है। इस माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या …
देवउठनी एकादशी कब हैं 2025
हर साल देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह का पर्व मनाया जाता है। कभी-कभी तिथि के संयोग से ये दोनों पर्व एक ही दिन …
धनतेरस 2025 में कब हैं
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 6:24 पर और सूर्यास्त शाम 5:48 पर होगा, जबकि ब्रह्म मुहूर्त 4:43 से 5:33 तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:00 से 2:46 तक, गोधूलि मुहूर्त 5:48 से 6:14 तक और निशिता मुहूर्त रात 11:41 से 12:31 तक रहेगा।
दशहरा 2025 में कब हैं
हिंदू पंचांग के अनुसार रावण दहन प्रदोष काल में करना शास्त्रसम्मत माना जाता है। इस बार सूर्यास्त का समय शाम 6:05 बजे रहेगा और प्रदोष काल शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक रहेगा। अतः रावण दहन के लिए यही समय सबसे शुभ माना जाएगा।