करवाचौथ पर चाँद कब निकलेगा

करवाचौथ का व्रत सुहागन महिलाएं अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए रखती हैं। यह व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है और इसे निर्जला, अत्यंत कठोर व्रत माना जाता है। इस बार करवाचौथ पर सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है और चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में विराजमान रहेंगे जिससे गौरी योग बनेगा। मान्यता है कि इस दिन गौरी गणेश की पूजा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर की रात 10:55 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर शाम 7:39 बजे तक रहेगी, उदय तिथि के अनुसार करवाचौथ का व्रत 10 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:58 से 7:11 बजे तक रहेगा। व्रत का आरंभ सुबह 6:08 बजे से होगा और इसका समापन रात 8:36 बजे चंद्रमा दर्शन के साथ किया जाएगा, जब चंद्रमा कृष्णा दशमी को उदित होगा। इस व्रत के लिए सबसे जरुरी होता है चाँद का समय, जिसकी जानकारी हम इस पोस्ट में दे रहे हैं, तो चलिए जानते हैं की करवाचौथ पर चाँद कितने बजे निकलेगा 2025 – Karva Chauth Par Chand Kitne Baje Niklega 2025

करवाचौथ पर चाँद कितने बजे निकलेगा 2025 – Karva Chauth Par Chand Kitne Baje Niklega 2025

करवा चौथ एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है जिसमें सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक कठोर निर्जला व्रत रखती हैं और अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को शुभ मुहूर्त में चौथ माता की पूजा की जाती है और करवा चौथ की कथा सुनी या सुनाई जाती है। रात में जब चंद्रमा उदित होता है, तो महिलाएं छलनी में दीपक रखकर चंद्रमा को देखती और जल अर्पित करती हैं, इसके बाद छलनी से अपने पति का दर्शन करती हैं। अंत में पति पत्नी को पानी पिलाकर व्रत का समापन कराता है, जिससे वैवाहिक जीवन में सौभाग्य और सुख-शांति बनी रहती है।

Karva Chauth Par Chand Kitne Baje Niklega– करवा चौथ के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:57 बजे से 7:11 बजे तक रहेगा, जिसमें सुहागिन महिलाओं को कुल 1 घंटा 14 मिनट का समय पूजा के लिए मिलेगा। इस दिन चंद्रोदय रात 8:13 बजे होगा, जिसके बाद महिलाएं चंद्रमा को छलनी से देख कर करवे से जल अर्पित करती हैं और अपना व्रत पूर्ण करती हैं। करवाचौथ व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी खाने से होती है, जिसे सास अपनी बहू के लिए तैयार करती हैं। सरगी में फल, मेवे, मिठाई और पराठे शामिल होते हैं, जो पूरे दिन निर्जला व्रत रखने की शक्ति प्रदान करते हैं।

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